एक खास बातचीत बहुमुखी प्रतिभा साली डीआईजी प्रसून बनर्जी के साथ लक्ष्मी शर्मा, क्या खास बात बताई देखिए !

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एक खास बातचीत बहुमुखी प्रतिभा साली डीआईजी प्रसून बनर्जी के साथ लक्ष्मी शर्मा, क्या खास बात बताई देखिए !

BAHRS GLOBAL NEWS, 09 JUL 2020
लक्ष्मी शर्मा ,दक्षिण दिनाजपुर : वो एक लेखक भी है एक साहित्यकार भी एक कवि भी हैं और एक फिल्म कार भी ऐसे ही बहुमुखी प्रतिभा साली व्यक्तित्व है डीआईजी प्रसून बनर्जी। एक कहावत है ना कि जहां चाह होती है वहीं राह होती है। और एक कहावत यह भी है कि मनुष्य जहां जन्म ना ले जहां पला बढ़ा ना हो फिर भी वहां की मिट्टी वहां की संस्कृति वहां की परंपरा को वह दुनिया के सामने ला रहा हो
ऐसी ही एक शख्सियत है जिसका नाम है प्रसून बैनर्जी जो एक बड़े तबके के आईपीएस अधिकारी हैं मालदा रेंज के डीआईजी हैं। जिसके तहत मालदा और दक्षिण दिनाजपुर दोनों जिले आते हैं। प्रसून बनर्जी का दक्षिण दिनाजपुर से नाता करीबन ৮ साल पुराना है। और उससे भी पुराना नाता उनका अपनी प्रतिभाओं से है अपने शौक से है जिनमें लेखन संस्कृति कवि फिल्म निर्देशन सब कुछ है।

उन्होंने हमसे खास बातचीत में शुरुआत की कि वह शुरू से ही इन सब चीजों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं लेखन उनका शौक है कविताओं में वह अपनी बात ब्या करते हैं हर फिल्म में वह दिखाते हैं अनजाने अनछुए इंसानी जिंदगी के पहलुओं को । जिसके पीछे वह स्थानीय तकनीको स्थानीय संगीत स्थानीय कलाकारों को । और बना डालते हैं एक बेहतरीन कहानी। ৫ फिल्में बना चुके इनकी एक फिल्म दादा साहेब पुरस्कार के लिए ২০১৮ में मनोनीत कि जा चुकी है। इसी साल उनकी एक फिल्म जिसका नाम मेन विल बी मेन है । रूस के फिल्म फेस्टिवल में सिलेक्ट की गई है। इस फिल्म में समाज में रह रहे इंसान के कई कई रूपों के बारे में एक अलग तरीके से दिखाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा दक्षिण दिनाजपुर जिला में रहस्य इतिहास कुछ खास बहुत कुछ है जिस पर मैंने लिखा है। और महसूस किया है उसे अपनी कविताओं में अपने नाटकों में मैंने जिया है। एक रोमांच सा है । जिन्हें मैं सबको दिखाना चाहता हूं सबके सामने लाना चाहता हूं की यह ला के कुछ खास है यहां की संस्कृति यहां का शिल्प सब अलग है।
कई किताबें लिख चुके आईपीएस अधिकारी प्रसून बनर्जी ने आगे बताया कि आपका सवाल बिल्कुल सही है जहां मैं हूं वहां समय मिल पाना बहुत कठिन है इन सब चीजों के लिए अपने मन को दिमाग को काफी तैयार और ऊर्जा रखनी पड़ती है अपने अंदर लिखने के लिए सोचने के लिए लेकिन।
जहां चाह वहां राह यह वाली कहावत तो आपने सुनी ही होगी बस इसी कहावत के अनुसार ही मैं अपना काम अपना सोक पूरा करता हूं। जब काम ज्यादा होता है तब थोड़ा कम समय मिलता है और जब काम कम होता है तब इन सब चीजों के लिए मुझे ज्यादा समय मिल जाता है। इस कोरोना काल में भी उनकी एक कविता की पूरी जिले में तूती बोल रही है।

15 COMMENTS

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